आरबीआई ने आपकी EMI में कोई राहत क्यों नहीं दी आइए तीन प्रमुख कारणों से इसे समझते हैं

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, जो कि 6.5% पर स्थिर है। विशेषज्ञों का पहले से ही अनुमान था कि इस बार भी आरबीआई ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा। आइए समझते हैं कि आरबीआई ने ऐसा क्यों किया।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, जो कि 6.5% पर स्थिर है। विशेषज्ञों का पहले से ही अनुमान था कि इस बार भी आरबीआई ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा। आइए समझते हैं कि आरबीआई ने ऐसा क्यों किया।

महंगाई पर काबू पाने की प्राथमिकता  

इस समय आरबीआई की सबसे बड़ी प्राथमिकता महंगाई, खासकर खाद्य महंगाई, को नियंत्रित करना है। अगस्त 2024 में खुदरा महंगाई दर 3.65% रही, जो मामूली बढ़त के साथ नियंत्रण में है। सरकार ने आरबीआई को खुदरा महंगाई को 4% के आस-पास रखने की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 2% घट-बढ़ का स्थान है। हालांकि, आलू, टमाटर और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि आरबीआई के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

वैश्विक अस्थिरता और तेल की कीमतें 

इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल पैदा किया है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका भी है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि आरबीआई ने ब्याज दर घटाने का जोखिम नहीं लिया है।

नकदी प्रवाह और विदेशी निवेश का खतरा  

हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों में आधा फीसदी की कटौती की है, जिससे अमेरिकी निवेशकों को ज्यादा मुनाफा मिल रहा है। ऐसे में वे बेहतर ब्याज दरों की तलाश में भारत जैसे उभरते हुए बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। अगर आरबीआई ने भी ब्याज दरों में कटौती की होती, तो देश में विदेशी पूंजी का अत्यधिक प्रवाह हो सकता था। इससे देश में नकदी का प्रवाह बढ़कर महंगाई और ज्यादा बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता। इसी कारण आरबीआई ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया।