गीता जयंती पर इन कार्यों को करने से मिलेगा लाभ, इन गलतियों से बचें
भगवद गीता हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र ग्रंथों में से एक है। यह न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अत्यंत लोकप्रिय है। गीता में मानव कल्याण और जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान बताया गया है। गीता जयंती का दिन इस ग्रंथ की विशेष महिमा को समझने और इसके उपदेशों को अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। आइए जानें कि गीता जयंती (2024) पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
भगवद गीता हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र ग्रंथों में से एक है। यह न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अत्यंत लोकप्रिय है। गीता में मानव कल्याण और जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान बताया गया है। गीता जयंती का दिन इस ग्रंथ की विशेष महिमा को समझने और इसके उपदेशों को अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। आइए जानें कि गीता जयंती (2024) पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
गीता जयंती का शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 दिसंबर को रात 03:42 बजे से शुरू होकर 12 दिसंबर को रात 01:09 बजे समाप्त हो रही है। उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष गीता जयंती 11 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
गीता जयंती पर करें ये कार्य
1. गीता का पाठ करें: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
2. श्रीकृष्ण की पूजा: भगवान श्रीकृष्ण की विधिपूर्वक पूजा करें।
3. व्रत रखें: गीता जयंती के दिन मोक्षदा एकादशी भी मनाई जाती है। आप इस दिन व्रत रख सकते हैं।
4. सात्विक भोजन करें: केवल शुद्ध और सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
इन कार्यों से बचें
1. तामसिक भोजन का त्याग करें: इस दिन मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें।
2. नकारात्मक विचारों से बचें: मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखें।
3. तुलसी को न छुएं: एकादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित न करें और तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
4.गीता का सम्मान करें: श्रीमद्भगवद्गीता को जमीन पर न रखें। इसे हमेशा स्वच्छ चौकी या स्टैंड पर रखें।
5. साफ-सफाई का ध्यान रखें: बिना स्नान किए या गंदे हाथों से गीता को न छुएं।
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