मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है
मकर संक्रांति का पर्व भारत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार फसल कटाई के मौसम की शुरुआत और ठंड के समापन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है। "संक्रांति" का अर्थ सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण होता है। सालभर में 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन मकर संक्रांति को इनमें सबसे खास माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन दही-चूड़ा खाने की भी परंपरा है। आइए, इस परंपरा के महत्व को समझते हैं।
मकर संक्रांति का पर्व भारत में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार फसल कटाई के मौसम की शुरुआत और ठंड के समापन का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है। "संक्रांति" का अर्थ सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण होता है। सालभर में 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन मकर संक्रांति को इनमें सबसे खास माना जाता है। कई स्थानों पर इस दिन दही-चूड़ा खाने की भी परंपरा है। आइए, इस परंपरा के महत्व को समझते हैं।
दही-चूड़ा खाने का महत्व
मकर संक्रांति पर बिहार और उत्तर प्रदेश में दही-चूड़ा का विशेष महत्व है। इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। मान्यता है कि दही-चूड़ा खाने से घर में खुशहाली आती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। यही कारण है कि इस परंपरा को इतने आदर और श्रद्धा से निभाया जाता है।
स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
2025 में मकर संक्रांति के दिन महा पुण्य काल सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। यह अवधि 1 घंटा 45 मिनट की होगी। शास्त्रों के अनुसार, इस समय में स्नान और दान करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति 2025 की तिथि और शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, 2025 में सूर्य 14 जनवरी को सुबह 8:44 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा। वहीं, इसके एक दिन पहले, 13 जनवरी, सोमवार को लोहड़ी का पर्व मनाया जाएगा।
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