माघ महीने में कालाष्टमी कब है,जानिए पूजा का सटीक समय एक ही जगह

सनातन धर्म में मासिक कालाष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, काल भैरव की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और अन्न-धन की कोई कमी नहीं होती। 

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सनातन धर्म में मासिक कालाष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, काल भैरव की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और अन्न-धन की कोई कमी नहीं होती। 

माघ माह की कालाष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि **21 जनवरी 2025** को दोपहर 12:39 बजे से प्रारंभ होकर **22 जनवरी 2025** को दोपहर 3:18 बजे समाप्त होगी। इसलिए माघ माह की कालाष्टमी का पर्व **21 जनवरी 2025** को मनाया जाएगा।  

शुभ समय:  

- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 बजे से 6:20 बजे तक  

- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:19 बजे से 3:01 बजे तक  

- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:49 बजे से 6:16 बजे तक  

- सूर्योदय: सुबह 7:14 बजे  

- सूर्यास्त: शाम 5:51 बजे  

- चंद्रोदय: रात 12:41 बजे  

- चंद्रास्त: सुबह 11:20 बजे  

पूजा विधि

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।  

2. घर और पूजा स्थान को साफ करें।  

3. भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।  

4. भगवान काल भैरव की मूर्ति या चित्र पर गंगाजल छिड़कें और उनका पूजन करें।  

5. दीप जलाएं और धूप-दीप से आरती करें।  

6. भगवान को फल, मिष्ठान्न और विशेष भोग अर्पित करें।  

7. मंत्रों का जाप करें और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।  

8. जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान करें।  

इन बातों का रखें ध्यान

- तामसिक भोजन और नशे का सेवन न करें।  

- किसी से विवाद या झगड़ा करने से बचें।  

- बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं का आदर करें।  

काल भैरव पूजन के लिए महत्वपूर्ण मंत्र

1. ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं। 

2. ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।  

3. ॐ ह्रीं बटुक! शापम विमोचय विमोचय ह्रीं कलीं।

4. र्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।  

   द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।  

5. ॐ नमो भैरवाय स्वाहा।  

6. ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय भयं हन।