नए साल में कब है लोहड़ी? जानें शुभ तिथि, मुहूर्त और योग
पौष महीने का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है **लोहड़ी**, जो हर साल **मकर संक्रांति** से एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना जाता है।
पौष महीने का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व है **लोहड़ी**, जो हर साल **मकर संक्रांति** से एक दिन पहले मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना जाता है।
लोहड़ी का महत्व और उत्सव
लोहड़ी का पर्व विशेष रूप से **पंजाब** और **उत्तर भारत** के कई हिस्सों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग संध्याकाल में लकड़ी का अलाव जलाते हैं और उसके चारों ओर परिवार और मित्रों के साथ एकत्रित होकर भांगड़ा और गिद्धा नृत्य करते हैं।
अलाव में लोग गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की और गुड़ से बनी वस्तुएं अर्पित करते हैं। यह परंपरा फसल कटाई और नई फसल की खुशी का प्रतीक है। साथ ही, अग्नि देव की पूजा करके सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना की जाती है।
लोहड़ी 2025: तिथि और समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य देव **14 जनवरी 2025** को सुबह 8:44 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि का मान है, इसलिए मकर संक्रांति **14 जनवरी** को मनाई जाएगी।
लोहड़ी, मकर संक्रांति से एक दिन पहले, यानी **13 जनवरी 2025** को मनाई जाएगी। इस दिन संध्याकाल तक अलाव जलाकर पर्व की खुशियां मनाई जाएंगी।
धार्मिक महत्व
लोहड़ी का पर्व फसल के पकने और तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। जैसे बिहू और वैशाखी पर्व में अग्नि देव की पूजा की जाती है, वैसे ही लोहड़ी में भी अग्नि की उपासना होती है। मान्यता है कि अग्नि देव की पूजा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है, साथ ही जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
विशेष योग और संयोग
लोहड़ी 2025 के दिन **भद्रावास योग** और **रवि योग** का दुर्लभ संयोग बन रहा है। संध्याकाल तक भद्रावास योग रहेगा, जो शाम 4:26 बजे समाप्त होगा। इसके अलावा, इस दिन **आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र** का भी शुभ संयोग बन रहा है। इन योगों में अग्नि देव की पूजा करने से अन्न और धन में वृद्धि होती है।
लोहड़ी का यह पर्व न केवल कृषि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है, बल्कि यह प्रेम, उल्लास और सामूहिकता का भी प्रतीक है।
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