पौष माह में कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
हर महीने मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्त विधिपूर्वक लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और जरूरतमंदों को दान करते हैं। मान्यता है कि इन कर्मों से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है, रुके हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसी वजह से हर माह इस दिन को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
हर महीने मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्त विधिपूर्वक लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और जरूरतमंदों को दान करते हैं। मान्यता है कि इन कर्मों से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है, रुके हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसी वजह से हर माह इस दिन को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
आइए जानते हैं पौष माह की मासिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Paush Janmashtami 2024) की खास जानकारी।
मासिक जन्माष्टमी 2024: तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि विवरण:
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 22 दिसंबर दोपहर 2:31 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 23 दिसंबर दोपहर 5:07 बजे
इस साल मासिक जन्माष्टमी का पर्व 22 दिसंबर को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:21 से 6:16 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:27 से 5:54 तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:53 से 12:48 तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:41 तक
सूर्य और चंद्र समय:
- सूर्योदय: सुबह 7:10
- सूर्यास्त: शाम 5:29
- चंद्रोदय: रात 12:13
- चंद्रास्त: दोपहर 12:01
पूजा विधि
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
2. सूर्य देव को अर्घ्य दें और घर के मंदिर की सफाई करें।
3. लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें और सुंदर वस्त्र, मुकुट, मोरपंख व बांसुरी से सजाएं।
4. चंदन का तिलक लगाकर घी का दीपक जलाएं और भगवान की आरती करें।
5. श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप करें और कृष्ण चालीसा का पाठ करें।
6. भोग में पंचामृत, पंजीरी, फल, मिठाई और माखन-मिश्री अर्पित करें।
7. सुख-शांति और सफलता के लिए प्रार्थना करें।
8. अंत में प्रसाद बांटें।
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